उत्तर प्रदेश सरकार
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1.1 राज्‍य सरकार ने भूतपूर्व मुख्‍य मंत्री गोवि‍न्‍द बल्‍लभ पन्‍त की अध्‍यक्षा में 1952 में एक अनुशास‍नि‍क कार्यवाही जॉच समि‍ति‍ (Disciplinary Proceedings Inquiry Committee) की स्‍थापना की थी। इस समि‍ति‍ ने अपनी रि‍पोर्ट में अन्‍य संस्‍तुति‍यों के अति‍रि‍क्‍त एक संस्‍तुति‍ यह भी की थी कि‍ ''संगठन एवं वि‍धि‍ (Organisation and Method)'' का कार्य करने के ‍िलए सचि‍वालय स्‍तर पर एक ''वि‍धि‍ एकक (Method & Unit)'' स्‍थापि‍त कि‍या जाय।

1.2 इस संस्‍तुति‍ को स्‍वीकार करते हुए श्री के0के0 दास, आई0सी0एस0, को पूर्णकालि‍क आयुक्‍त, पुर्नसंगठन एवं निदेशक (Reorganisation cum Director) संगठन एवं विधि प्रभाग, अक्‍टूबर, 1955 में नि‍युक्‍त कि‍या गया, जो कि‍ मुख्‍य सचि‍व शाखा में पदेन अति‍रि‍क्‍त सचि‍व भी थे और जो सीधे मुख्‍य मंत्री के अधीन कार्य करते थे। उनके मुख्‍य कर्तव्‍य कलेक्‍ट्रेट कार्यालयों, वि‍भागाध्‍यक्ष कार्यालयों तथा सचि‍वालय की शाखाओं का पुर्नगठन एवं अभि‍नवीकरण करना था।

1.3 राज्‍य सरकार में वर्ष 1923 से मुख्‍य नि‍रीक्षक, राजकीय कार्यालय के अधीन एक राजकीय कार्यालय नि‍रीक्षणालय था, जो वि‍त्‍त वि‍भाग के अधीन कार्यरत था। इस संगठन को नवगठि‍त सामान्‍य प्रशासन (पुनस्‍संगठन) वि‍भाग के अधीन लाया गया ताकि‍ यह संगठन, संगठन एवं वि‍धि‍ एकक को सहयोग प्रदान कर सके और तब यह पूर्ण रूप से इस वि‍भाग का अंग बन गया। पूर्णकालि‍क आयुक्‍त, पुनस्‍संगठन एवं नि‍देशक का पद फरवरी, 1958 तक ही रहा और तत्‍पश्‍चात् इसका प्रभार मुख्‍य सचि‍व की अध्‍यक्षता में सचि‍व अथवा संयुक्‍त सचि‍व अथवा उप सचि‍व के अधीन रहा।

1.4 सचि‍वालय के वि‍भि‍न्‍न वि‍भागों में दक्षता के प्रयास स्‍वयं उत्‍पन्‍न हो, इस दृष्‍टि‍ से मई, 1958 में प्रत्‍येक शाखा में एक ज्‍येष्‍ठ अधि‍कारी को ओ0 एण्‍ड एम0 आफि‍सर नि‍युक्‍त कि‍या गया, जो अपने अन्‍य दायि‍त्‍वों के अलावा अपनी शाखाओं के कार्यों का अध्‍ययन करें और ऐसे तौर. तरीके अपनायें, जि‍ससे कार्य तत्‍परता, दक्षता और मि‍तव्‍ययि‍ता से सम्‍पन्‍न हों। कि‍न्‍तु इन अधि‍कारि‍यों के पास समय कम होने के कारण बाद में यह व्‍यवस्‍था प्रभावी नहीं समझी गयी। अत: अप्रैल, 1960 में संगठन एवं वि‍धि‍ प्रभाग में कुछ पूर्णकालि‍क अधि‍कारी नि‍युक्‍त करके एक न्यूक्‍लि‍यस (Nucleus) बनाया गया ताकि विद्यमान शासकीय व्‍यवस्‍थाओं का परीक्षण एवं उनके संगठन एवं पद्धति‍यों के कार्य अध्‍ययन के पश्‍चात कार्य नि‍स्‍तारण के अच्‍छे तरीके खोजे जा सके और अनावश्‍यक कार्य तथा अपरि‍हार्य वि‍लम्‍ब को दूर कि‍या जा सके तथा मानव एवं सामग्री के संसाधनों का सर्वोत्‍तम उपयोग ‍कि‍या जा सके। यह वि‍भाग कार्य मापन तथा उसके आधार पर स्‍टाफ की आवश्‍यकताओं का भी परीक्षण करता था और वि‍भि‍न्‍न अधि‍ष्‍ठानों में फालतू कर्मचारि‍यों को भी देख रेख रखता था तथा इसने वि‍भि‍न्‍न कार्यों के मानक र्नि‍धारि‍त कि‍ये और प्रक्रि‍‍याओं का सरलीकरण कि‍या।

1.5 अप्रैल, 1974 में इस वि‍भाग का पुन: संगठन कि‍या गया और इसे प्रशासनि‍क सुधार का नाम दि‍या गया। मई, 1976 में नई दि‍ल्‍ली में हुए मुख्‍य सचि‍वों के सम्‍मेलन की संस्‍तुति‍यों के आधार पर इस नवगठि‍त प्रशासनि‍क सुधार वि‍भाग के अन्‍तर्गत एक प्रशासनि‍क सुधार नि‍देशालय की स्‍थापना वर्ष 1978 में की गयी, जि‍सके नि‍देशक इस वि‍भाग के सचि‍व ही रखे गये और उनके अति‍रि‍क्‍त एक संयुक्‍त नि‍देशक एवं उप सचि‍व, तीन ज्‍येष्‍ठ शोध अधि‍कारी, छ: शोध अधि‍कारी तथा कुछ सम्‍पूरक कर्मचारी थे। यह नि‍देशालय कार्यों की वि‍भि‍न्‍न प्रणालि‍यों का गहराई से अध्‍ययन करता है तथा प्रशासकीय समस्‍याओं का गहन अध्‍ययन कर अधि‍कारों के प्रति‍नि‍धायन एवं प्रक्रि‍‍याओं के सरलीकरण, जनता को सुवि‍धा पहुचाने, भ्रष्‍टाचार को रोकने तथा जनता की शि‍कायतों को दूर करने एवं वि‍भि‍न्‍न कार्यालयों, उच्‍च न्‍यायालय, लोक सेवा आयोग आदि‍ महत्‍वपूर्ण संगठनों में स्‍टाफ की आवश्‍यकताओं का परीक्षण भी करता है।

1.6 प्रशासनि‍क सुधार वि‍भाग के अन्‍तर्गत दि‍नांक 14 सि‍तम्‍बर, 2005 को उत्‍तर प्रदेश राज्‍य सूचना आयोग का गठन भी कि‍या गया है जि‍सका कार्यालय इंदि‍‍रा भवन के छठे मंजि‍ल पर है । उत्‍तर प्रदेश राज्‍य सूचना आयोग का कार्य सूचना का अधि‍कार अधि‍नि‍यम, 2005 के अन्‍तर्गत द्वि‍तीय अपील तथा शि‍कायतों का नि‍स्‍तारण करना है।